शुक्रवार, 15 दिसंबर 2017

अमेरिकन इंडिया फाउंडेशन (AIF) और कोका-कोला इंडिया ने लॉन्च किया ‘SMS मिशन रिसाइक्लिंग’, स्कूली बच्चों को कचरा प्रबंधन एवं रिसाइक्लिंग के प्रति जागरूक बनाया जाएगा

दिल्ली : कोका-कोला इंडिया ने अमेरिकन इंडिया फाउंडेशन (AIF) के साथ मिलकर आज SMS मिशन रिसाइक्लिंग शुरु करने की घोषणा की। इसका उद्देश्य 5000 से अधिक स्कूलों के बच्चों को कचरा प्रबंधन के लिए जागरूक बनाना है। सपोर्ट माइ स्कूल (SMS) मिशन 1000 स्कूल्स की सफलता के बाद अब यह नया मिशन शुरु किया गया है। इस परियोजना का उद्देश्य भारत सरकार के स्वच्छता मिशन में योगदान देना है। इसके जरिये सही ढंग से कचरा जमा करने एवं कचरे के अलगाव पर ध्यान देना है जिसमें पॉलीथीन टेरिफ्थेलैट (PET) भी शामिल होगा।
SMS मिशन रिसाइक्लिंग पहल का उद्देश्य रिसाइक्लिंग के लिए प्रभावी ढंग से कचरा जमा करने तथा उसे अलग करने की प्रक्रियाएं अपनाते हुए बेहतर कचरा प्रबंधन पद्धतियों को बढ़ावा देना है। सरकार के स्वच्छ भारत, स्वच्छ विद्यालय मिशन से जुड़ा यह कार्यक्रम समाज में तथा स्कूलों में कचरा प्रबंधन प्रणाली स्थापित करने या इसके लिए मदद करने के लिए काम करेगा। कार्यक्रम में पहले चरण में, कोका-कोला इंडिया ने अमेरिकन इंडिया फाउंडेशन (AIF) के साथ भागीदारी करते हुए देशभर में 5000 से अधिक सरकारी स्कूलों के लगभग 11 लाख बच्चों तथा 1 लाख से अधिक नागरिकों के बीच सकारात्मक प्रभाव निर्माण करने का लक्ष्य रखा है। इसके अंतर्गत उन्हें सही ढंग से ठोस कचरा प्रबंधन करने के लंबी अवधि के फायदों के बारे में बताया जाएगा।
निशांत पांडे, सीईओ, अमेरिकन इंडिया फाउंडेशन ने कहा, “पूरे भारत के स्कूलों में सफाई एवं स्वच्छता मुद्दों पर जागरूकता निर्माण करने के हमारे अनुभव के आधार पर, हमारा मानना है कि स्कूली छात्रों को कचरा प्रबंधन तथा रिसाइक्लिंग पद्धतियों के साथ जोड़ने से उन्हें हमारे भविष्य में स्थाई प्रक्रियाओं की विशाल भूमिका के बारे में गहरी समझ प्रदान की जा सकती है। सपोर्ट माइ स्कूल – मिशन रिसाइक्लिंग अभियान के लिए कोका-कोला के साथ भागीदारी करते हुए हम उत्साहित हैं, जिसका उद्देश्य 10 राज्यों के 5000 स्कूलों तक पहुंचना है। इस अभियायन के जरिये बच्चों को एक स्वच्छ तथा स्थाई भविष्य निर्माण करने का अवसर दिया जाएगा।”
टी. कृष्णकुमार, प्रेसिडेंट, कोका-कोला इंडिया एवं साउथ वेस्ट एशिया ने कहा, “हम यह मानते हैं कि हमारे सभी कार्यों में स्थायी विकास पर प्रमुख ध्यान होना चाहिए और हमें अपने भागीदारों के साथ मिलकर एक स्थायी भविष्य के लिए समाधान ढूंढने एवं विकसित करने के लिए काम करना ज़रूरी है। अब हम अमेरिकन इंडिया फाउंडेशन के साथ भागीदारी में SMS मिशन रिसाइक्लिंग लॉन्च करते हुए उत्साहित हैं। इस पहल का उद्देश्य स्कूली बच्चों और समाज में कचरा अलग करने तथा रिसाइक्लिंग करने के सही तरीकों के बारे में जागरूकता निर्माण करना है। बच्चे एक बेहतर भविष्य के लिए परिवर्तन के प्रतिनिधि हैं और उनके पास अपने समुदाय को जागरूक बनाने की क्षमता है। साथ ही, हमारे देश का भविष्य होने के नाते वे इन पर्यावरणीय लक्ष्यों के साथ जुड़े रहकर बड़े हो सकेंगे।”
सपोर्ट माइ स्कूल के प्रथम संस्करण ने देशभर के 1000 से अधिक स्कूलों में 3.5 लाख स्कूली बच्चों पर सकारात्मक प्रभाव निर्माण किया था। इस सफर के दौरान, हजारों शौचालय, मूत्रालय और वॉश स्टेशनों का नवीनीकरण किया गया और पिछड़े स्कूलों में सैकड़ों खेल मैदान बनाए गए। सपोर्ट माइ स्कूल ने वॉश (जल, स्वच्छता एवं सफाई) की ज़रूरतों को पूरा किया तथा सरकार के ‘स्वच्छ भारत’ अभियान में महत्वपूर्ण योगदान देते हुए स्कूलों को पुनर्जीवित किया है। यही स्कूल अब विभिन्न जिलों में मॉडल स्कूल की भूमिका निभा रहे हैं।
एमएसएस मिशन 1000 के प्रथम क्रियान्वयन सहयोगी चैरिटीज़ एड फाउंडेशन (CAF) के चीफ ऑपरेशनल ऑफिसर अविजीत कुमार ने कहा, “सपोर्ट माइ स्कूल एक आधुनिक अभियान है, जिसका लक्ष्य देश के हज़ारों बच्चों के जीवन में विकासात्मक बदलाव लाना है। हम इस अभियान से जुड़ने पर बेहद गौरवशाली महसूस करते हैं। बच्चों को रेन वाटर हार्वेस्टिंग के बारे में शिक्षित करने से लेकर उचित स्वच्छता सुविधाओं की उपलब्धता सुनिश्चित कराते हुए, इस अभियान ने स्कूलों में एक सकारात्मक माहौल बनाने में मदद की है। इस तरह के प्रयास हमारे देश में विस्तृत सामाजिक-आर्थिक फासलों को घटाने तथा शिक्षा की असमानता दूर करने के लिए आवश्यक हैं। देश के 1000 स्कूलों में इस अभियान का प्रभाव देखना बेहद संतोषजनक रहा है।”
भूषण तुलाधर, रीजनल टेक्निकल एडवाइज़र, साउथ एशिया – यूएन-हैबिटेट ने कहा, “सपोर्ट माइ स्कूल (SMS) अभियान के सभी भागीदारों को “SMS मिशन 1000” की सफलता के लिए हम बधाई देते हैं। यह काफी सराहनीय है कि इस अभियान ने क्षेत्र के 1100 स्कूलों में 400,000 से अधिक छात्रों तक पहुंचने में सफलता पाई है। हम इस पहल के अगले चरण – SMS मिशन रिसाइक्लिंग को अपना समर्थन जारी रखने की उम्मीद करते हैं।”
कोला-कोला इंडिया लगातार स्कूली शिक्षा के क्षेत्र में एक सकारात्मक बदलाव लाने के लिए काम कर रही है और यह कंपनी स्थायित्व पर भरपूर ध्यान देती है।

गुरुवार, 14 दिसंबर 2017

किड्स रिएलिटी डांस शो 'सुपर डांसर चैप्टर 2' में रोबोट ने मुस्कान शर्मा को सरप्राइज दिया

मुम्बई : हाल ही में, रामदेव बाबा ने सोनी एंटरटेनमेंट टेलीविजन के सबसे बड़े किड्स रिएलिटी डांस शो 'सुपर डांसर चैप्टर 2' के सेट की शोभा बढ़ाई। 'रोबोटिक गर्ल' मुस्कान शर्मा की बेहतरीन परफॉर्मेंस के बाद, सेट पर एक असली रोबोट आ गया। मुस्कान जो साफ तौर पर सरप्राइज थी, वह यह जानने के लिए उत्साहित थी कि क्या हो रहा है।
इस रोबोट ने कुछ अच्छे रोबोटिक स्टेप्स करके दिखाए और मुस्कान की डांसिंग स्टाइल की नकल भी उतारी। लेकिन मुस्कान को असली सरप्राइज तब मिला जब इस व्यक्ति ने अपना मास्क हटाया, क्योंकि यह कोई और नहीं बल्कि मुस्कान के पिता थे, जो उसे सरप्राइज देने के लिए इंदौर से आए थे। मुस्कान शर्मा जिन्हें पिछले पांच महीने से अपने पिता से मिलने का मौका नहीं मिल पाया था, वह उनसे मिलकर काफी भावुक हो गई और उनकी आंखों से आंसू निकलने लगे।
सुपर डांसर चैप्टर 2 की टीम ने शो के सेट पर मुस्कान के पिता को लाकर उन्हें सरप्राइज देने का फैसला किया था। इसलिए, उनके पिता रोबोट की ड्रेस पर स्टेज पर आए और उनके कदम से कदम भी मिलाया। मुस्कान शर्मा, जिन्हें आखिरकार अपने पिता से मिलने का मौका मिल गया था, वह अपनी भावनाओं को नियंत्रित नहीं कर सकी और उनकी आंखों में आंसू आ गए।
सेट से जुड़े स्रोत ने बताया, "पिता और बेटी के बीच का बंधन कभी भी नहीं टूटता है। पांच महीने के बाद अपने पिता से आखिरकार मिलने पर मुस्कान शर्मा की आंखों में आंसू आ गए, जिसके बाद उन्होंने रोबोटिक स्टाइल में स्टेज पर धमाल मचा दिया।"

सुपर डांसर चैप्टर 2 में वैष्णवी ने एरियल योगा करने के लिए बाबा रामदेव को चुनौती दी !

मुम्बई : वैष्णवी प्रजापति सुपर डांसर चैप्टर 2 में एक के बाद एक अपनी बेहतरीन परफॉर्मेंस से सभी को प्रभावित करती आई है। 5 साल की इस बच्ची को न केवल बॉलीवुड स्टार रेखा और रवीना टंडन से प्रशंसाएं मिली हैं, बल्कि इस बार उसने अपने जादूई डांस स्टेप्स से बाबा रामदेव का मनोरंजन भी किया। बाबा रामदेव उसके डांस से इतने प्रभावित थे कि उन्होंने यह टिप्पणी भी की कि केवल समर्पण, ध्यान और कड़ी मेहनत से व्यक्ति ऐसे प्रतिभाशाली परफॉर्मर बन सकता है।

हालांकि, वैष्णवी को न केवल जज शिल्पा शेट्टी, अनुराग बसु और गीता कपूर सहित सभी से बहुत वाहवाही मिली, बल्कि उन्होंने बाबा रामदेव को चुनौती देने की योजना भी बनाई हुई थी। वैष्णवी की इस असाधारण परफॉर्मेंस के बाद, बाबा रामदेव को भी एरियल योगा परफॉर्म करना पड़ा और उन्होंने भी हर किसी को प्रेरित करने का यह मौका नहीं छोड़ा। सेट पर मौजूद लोग यह देखकर आश्चर्यचकित थे कि कैसे बाबा रस्सा पर भी चढ़ सकते थे।

बाबा रामदेव के एक्ट न केवल वैष्णवी को बल्कि वहां मौजूद हर किसी को महान सफलता हासिल करने के लिए कड़ी मेहनत करने के लिए प्रेरित किया।स्टेज पर बाबा रामदेव और वैष्णवी के साथ शिल्पा शेट्टी भी शामिल हुईं। वह भी रस्सी पर चढ़ी।

मंगलवार, 12 दिसंबर 2017

विजय और बुलबुल की प्रेम कहानी परवान चढ़ रही है

मुम्बई : अपने पॉलिटिकल ड्रामा से दर्शकों का दिल जीत रहा स्टार भारत का लोकप्रिय शो ‘साम दाम दंड भेद’ विजय और बुलबुल की प्रेम कहानी के लिए तैयार है। शो में भानु उदय विजय और ऐश्वर्या खरे बुलबुल की भूमिका निभा रहीं हैं।

विपरीत हालात में बुलबुल और विजय की शादी होती है। बुलबुल विजय को पसंद करती है, जबकि विजय शायद ही उससे कभी नजर मिलाता है। एक दूसरे के विपरीत होने और पर्सनालिटी में अंतर होने के बावजूद स्क्रीन पर
अच्छे कपल के रूप में उनमें आपस में प्रेम कैसे पनपता है, यह देखना और उनके प्यार को परवान चढ़ते देखना दिलचस्प होगा।

इस बारे में बताते हुए भानु उदय कहते हैं, “मैं बुलबुल के साथ बढ़ती प्रेम कहानी को एन्जॉय कर रहा हूं। पूरी तरह अजनबी दो लोगों का एक दूसरे को जानना और प्यार में पड़ना, इस तरह का किरदार निभाना वास्तव में मजेदार है। मैं बुलबुल के साथ इन सीन्स का लुत्फ़ ले रहा हूं। वे एक बहुत अच्छी अभिनेत्री हैं और उनकी मासूमियत बहुत ही दुर्लभ और प्यारी है, उनके साथ काम करके मैं खुश हूं।

सोमवार, 11 दिसंबर 2017

शाहरुख भीड़ के बीच बहुत सहज रहते हैं : अभिनेता श्रेयस तलपड़े

मुम्बई : अभिनेता श्रेयस तलपड़े ने अपने दिल की बात बताते हुए कहा कि वो जीवन में एक दिन किंग खान के साथ परदे पर नजर आना चाहते हैं। चूंकि, शाहरुख खान 10 दिसंबर से, शाम 7 बजे अपने नये शो ‘टेड टॉक्स इंडिया नई सोच’ के साथ आने के लिए पूरी तरह तैयार हैं। ऐसे में, इस शो के लिये श्रेयस ने उन्हें अपनी शुभकामनाएं दी हैं।

‘टेड टॉक्स इंडिया नई सोच’ पहली बार हिन्दी में टेलीविजन पर आ रहा है, ऐसे में श्रेयस को लगता है कि शाहरुख खान से बेहतर इस शो को कोई और होस्ट नहीं कर सकता। उन्होंने कहा, ‘‘शाहरुख भीड़ के बीच बहुत सहज रहते हैं, इसलिये उनसे बेहतर इस शो के साथ और कोई न्याय नहीं कर सकता। वो बहुत अच्छे इंसान हैं और मेरी इच्छा है कि मैं एक दिन उनके साथ काम करूं।‘‘ साथ ही श्रेयस ने कहा कि शादी के बारे में विचार करने ने उनकी जिंदगी को पूरी तरह बदल दिया।

शनिवार, 9 दिसंबर 2017

अलंकार ज्वैलर्स ने डि बीयर्ज़ ग्रुप ऑफ कम्पनीज के हीरे के ब्रांड, फॉरएवरमार्क को लाँच करके इस ब्रांड के साथ के साथ हाथ मिलाया

पटना : अलंकार ज्वैलर्स, एक ऐसा ब्रांड, जिसने गुणवत्ता और सेवा के बेजोड़ मानदंड स्थापित किए हैं, पटना में अपने स्टोर में डि बीयर्ज़ ग्रुप ऑफ कम्पनीज के हीरे के ब्रांड, फॉरएवरमार्क को लाँच करके इस ब्रांड के साथ के साथ हाथ मिलाया है।
जहाँ फॉरएवरमार्क खूबसूरत, दुर्लभ और जिम्मेदारी के साथ प्राप्त किए गए हीरों का वादा साथ लेकर आता है, अलंकार ज्वैलर्स आभूषण निर्माण के क्षेत्र में अग्रणी हैं और अभिनवकारी तकनीकों के पथ प्रदर्शक हैं। इन दोनों ब्रांडों के तालमेल ने हॉलमार्क वाले आभूषणों को बनाकर एक आदर्श सहभागिता का आरंभ किया हैं।
इस साझेदारी का जश्न मानते हुए, प्रतिभाशाली फिल्म स्टार हुमा कुरेशी ने अलंकार ज्वैलर्स के फॉरएवरमार्क हीरों के साथ तैयार किया गए विशिष्ट संग्रह अनावरण किया। उत्कृष्ट फॉरएवरमार्क अलंकारों से सजी हुमा ने कहा, ‘‘फॉरएवरमार्क हीरे की एक अद्वितीय पहचान संख्या है जो इसके वचन का सत्यापन करती है। अलंकार ज्वैलर्स अपने ग्राहकों को बेहतरीन हीरे का अनुभव प्रदान करते हैं। चूंकि फॉरएवरमार्क और अलंकार ज्वैलर्स ने अत्यंत खूबसूरत हीरे के गहने की इतनी अधिक किस्मों को प्रदर्शित करने के लिए साझेदारी की हैं, इस कार्यक्रम का हिस्सा होना मेरे लिए वास्तव में एक सम्मान की बात हैं।’’
इस साझेदारी के महत्व को दर्शाते हुए, अलंकार ज्वैलर्स के निदेशक, मनीष गुप्ता ने कहा, ‘‘दुनिया के 1 प्रतिशत से कम हीरे ही फॉरएवरमार्क बनने के पात्र हैं। हम फॉरएवरमार्क के साथ भागीदारी करने पर खुश हैं क्योंकि उनके पास चयन की सबसे कठोर प्रक्रिया है जिससे वे अपने भागीदारों को केवल सर्वश्रेष्ठ गुणवत्ता वाले हीरे ही प्रदान करते हैं। हमारे डिजाइनों में इन हीरों का उपयोग न केवल आभूषण को और भी सुंदर बनाता है बल्कि हमारे ग्राहकों के साथ हमारी विश्वसनीयता को भी बढ़ाता है।’’
इस साझेदारी पर बोलते हुए, फॉरएवरमार्क इंडिया के अध्यक्ष, सचिन जैन ने कहा, ‘‘बिहार राज्य के एक प्रमुख अग्रणी आभूषण निर्माता, अलंकार ज्वैलर्स के साथ जुड़ने पर फॉरएवरमार्क को गर्व है। फॉरएवरमार्क केवल अलंकार ज्वैलर्स जैसे खुदरा विक्रेताओं के साथ साझेदारी करता है, जो न केवल अपने क्षेत्र में अग्रणी हैं, बल्कि इस ब्रांड के कड़े मानदंड, व्यवसाय, सामाजिक और र्प्यावरणीय सत्यनिष्ठा को भी पूरा करते हैं। अलंकार ज्वैलर्स के बेहद सुंदर डिजाइन और शिल्पकारिता फॉरएवरमार्क हीरे की सुंदरता को बढ़ाती हैं और हम उनके साथ एक लंबे समय तक चलने वाले संबंध ही उम्मीद करते हैं।’’
फॉरएवरमार्क हीरे दुनिया के सबसे अधिक ध्यानपूर्वक चयनित हीरे होते हैं। प्रत्येक फॉरएवरमार्क हीरा कठोर चयन प्रक्रिया से होकर गुजरता है और उसके ऊपर एक अद्वितीय अभिलेख होता है जो इस बात का आश्वासन है कि हर फॉरएवरमार्क हीरा सुंदर, दुर्लभ और जिम्मेदारी के साथ प्राप्त किया गया है। दुनिया के 1 प्रतिशत से कम हीरे इस अभिलेख के योग्य हैं, जो इस बात का वचन है कि हीरे को ध्यानपूर्वक फॉरएवररमार्क के गुणवत्ता और प्रामाणिकता के मानकों को पूरा करने के लिए चुना गया है। सुरुचिपूर्ण कृतियों का निर्माण करने के लिए श्रेष्ठ गुणवत्ता और अन्नय डिज़ाइनों का संयोजन करने के लिए जाने वाले अलंकार ज्वैलर्स फॉरएवरमार्क के वादे को आगे बढ़ाएंगे।

गुरुवार, 7 दिसंबर 2017

डाउन सिंड्रोम बीमारी से ग्रसित देवांशी जोशी ने जीता एनसीपीईडीपी-माइंडट्री हेलन केलर पुरस्कार

  • बौद्धिक विकलांग व्यक्तियों की रोजगार की जरूरत

दिल्ली : जब भी आप दिल्ली के आर.के.पुरम के ग्राम भारत आएंगे, तो वहाँ एक हंसमुख औरत को स्वागत करते हुए पाएंगे। वे 2013 से यहां स्टोर असिस्टेंट के रूप में काम कर रही हैं। काम से देवांशी ने अपने ग्राहकों के दिलों में एक खास जगह बनाई है। ग्राहक उनके इतने बडे फेन हैं कि वे सिर्फ उनसे मिलने ही स्टोर जाते हैं।
देवांशी ने डाउन सिंड्रोम की चुनौतियों को पार कर लिया है। ये आनुवांशिक स्थिति से उत्पन्न शारीरिक वृद्धि और बौद्धिक विकलांगता में विलम्ब के कारण होने वाली बीमारी है।
एक कर्मचारी के रूप में देवांशी का सपना जिम्मेदार, विश्वसनीय और ग्राहकों और आपूर्तिकर्ताओं के प्रति सम्मान बनाए रखना है। अपने काम के प्रति गरिमा का भाव रखते हुए वे अपने जूनियर्स को नए-नए काम को सीखने में मदद करती हैं। खुद भी एक उत्सुक विद्यार्थी की तरह सीखती हैं। वे न केवल उत्पाद कोड और कीमतों को याद करती हैं, बल्कि सामान के स्टॉक और शेड्यूल को भी याद रखती है। एनसीपीईडीपी-माइंडट्री हेलन केलर पुरस्कार के विजेता के रूप में देवंशी पुरस्कार के मूल्यों का प्रतीक हैं।
एनसीपीईडीपी के मानद निदेशक जावेद अबीदी ने कहा, यह पुरस्कार उन विकलांग व्यक्तियों और संगठनों को दिया जाता है, जिन्होंने विकलांग लोगों के लिए रोजगार के अवसरों को आगे बढ़ाने में आदर्श स्थापित किया है। देवांशी की सफलता इसलिए मायने रखती है, क्योंकि भारत अभी तक पूरी तरह से विकलांगता को समझ नहीं पाया है। भारतीयों के लिए विकलांगता का अर्थ हमेशा ही अंधत्व और व्हीलचेयर का उपयोग करने वाला होता है। मांसपेशियों की विकृति, कुष्ठ रोग, सिकल सेल एनीमिया, सेरेब्रल पाल्सी, डाउस सिंड्रोम और बौनावाद में भारत कब विकलांगता देखेगा और अपना उपेक्षा भाव दूर करेगा?
माइंडट्री के कृष्ण कुमार नटराजन ने इस समारोह की अध्यक्षता की। उन्होंने कहा, माइंडट्री को एनसीपीईडीपी का समर्थन करने पर गर्व है। यह देखते हुए कि उसके सभी काम और अभियान विकलांगों के लिए एक बेहतर समाज बनाने की दिशा में कार्यरत हैं। उन्होंने आगे कहा कि डिजिटल इकोसिस्टम विकलांग व्यक्तियों के लिए वेबसाइटों को सुलभ बनाने के महत्व पर जोर नहीं दे सकता। इसके अलावा सौरभ चंद्र, एनसीपीईडीपी के जूरी सदस्य और ट्रस्टी, कृष्णकुमार नटराजन, अध्यक्ष माइंडट्री लिमिटेड और सुरेश जांदियाल, ओएनजीसी भी उपस्थित थे।

इस वर्ष एनसीपीईडीपी-माइंडट्री हेलेन केलर पुरस्कार को निम्नलिखित श्रेणियों में दिया गया।

श्रेणी ए : अक्षम व्यक्तियों के रोल मॉडल

ऐसे विकलांग व्यक्ति जो रोजगार के क्षेत्र में विकलांगों के लिए रोल मॉडल के रूप में सकारात्मक भूमिका निभाते हैं।
1. डॉ. चारुदत्ता जाधव रू हेड एक्सेसबिलिटी सीओई, टाटा कंसल्टेंसी सर्विसेज लिमिटेड
2. देवांशी जोशी रू स्टोर सहायक, ग्राम भारत
3. डॉ. निर्मिता नरसिम्हा रू नीति निदेशक, इंटरनेट और सोसाइटी के लिए केंद्र
4. प्रदीप सिन्हा रू एक्सीक्यूटिव, डैल -एएमसी में इशू रिट्रैवल सेंटर में आईटी मैनेजमेंट सहायक

श्रेणी बी : असमर्थित लोगों के लिए रोजगार के अवसरों की भूमिका के रोल मॉडल

विकलांगता के क्षेत्र में ऐसे व्यक्ति, जिन्होंने लंबे समय तक विकलांगों के लिए रोजगार के अवसरों को बढ़ावा देने में योगदान दिया है।
1. एसवी कृष्णन – सीईओ, डायलॉग इन द डार्क – एसीई टेक-1
2. स्वामीनाथन सुब्रह्मण्यम – प्रबंधक, भुगतान और संचालन, एएनजेड बेंगलुरु सेवा केंद्र

श्रेणी सी : रोल मॉडल कंपनियों / गैर सरकारी संगठन / संस्थान

विकलांगता से जुड़े संगठनों या विकलांगों के लिए रोजगार के समान अवसरों को बढ़ावा देने के प्रति अपनी प्रतिबद्धता दिखाने वाले।
1. बैरियरब्रेक सॉल्यूशंस प्राइवेट लिमिटेड
2. हट्टी फूड एंड बेवरेजस् प्राइवेट लिमिटेड
3. द लेमन ट्री होटल कंपनी
4. विंध्या ई इन्फोमीडिया प्राइवेट लिमिटेड

17 दिसंबर से अंतर्राष्ट्रीय फिल्म फेस्टिवल खजुराहो में, उद्घाटन करेंगे मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान

  • कनाडा फिल्म उद्योग भी इसमें पार्टनर होगा
  • उद्घाटन मध्यप्रदेश के मुख्यमंत्री करेंगे, समापन समारोह के मुख्य अतिथि उपराष्ट्रपति होंगे
  • शेखर कपूर, जैकी श्रॉफ, रमेश सिप्पी और प्रेम चोपड़ा समेत कई नामी फिल्मकार अतिथि होंगे
मुम्बई : मध्यप्रदेश में तीसरा 'खजुराहो इंटरनेशनल फिल्म फेस्टिवल' (केआईएफएफ) 17 से 24 दिसंबर तक आयोजित किया जा रहा है। इसका उद्घाटन मध्यप्रदेश के मुख्यमंत्री  शिवराजसिंह चौहान करेंगे। '
केआईएफएफ' के समापन समारोह के मुख्य अतिथि होंगे देश के उपराष्ट्रपति वेंकैया नायडू। इस बार कनाडा फिल्म उद्योग भी 'केआईएफएफ' का पार्टनर होगा।'
केआईएफएफ' में देश के जाने-माने फिल्मकार, एक्टर, एक्ट्रेस शेखर कपूर, प्रेम चोपड़ा, अनुराग बासू, जैकी श्रॉफ, रंजीत, भारती अचरेकर, पंकज पाराशर, सुशांत सिंह (राजपूत नहीं), रमेश सिप्पी, कुलमीत मक्कर, किरण जुनेजा और मनमोहन शेट्टी समेत फिल्मों से जुड़े कई लोग शिरकत करेंगे।

बुधवार, 6 दिसंबर 2017

शीतल ठक्कर की होगी 'जीजी माँ' में एंट्री

मुम्बई : साराभाई वर्सेस साराभाई, करीना करीना फेम शीतल ठक्कर ने कई लोकप्रिय टेलीविज़न शोज के लिए काम किया है. आखिरी बार उन्हें सतरंगी ससुराल और लाइफ ओके के बाजीगर में देखा गया था. जल्द ही स्टार भारत के शो ‘जीजी माँ ’ में उनकी एंट्री होने वाली है. वह उत्तरा देवी के बिज़नेस राइवल मैथिली सेनगुप्ता की भूमिका निभाएंगी. 

उत्तरा निरंकुश है जबकि मैथिली लोकतांत्रिक है. वह हर किसी की राय पूछती है और अपने कर्मचारियों को खुश रखने में विश्वास रखती है. मैथिली एक आइडियल बॉस की भूमिका निभाएंगी. एक ऐसा बॉस जैसा हर कोई चाहता है. 

एक नवजात बच्चे की मां, शीतल ने टेलीविजन से लंबा ब्रेक लिया था और अब एक नए रूप और पावरफुल लुक में वापसी कर रहीं हैं. शीतल कहती हैं, “ मुझे रेगुलर डेली शोप से अलग मैथिली की भूमिका मिली. एक मजबूत लेकिन विनम्र और दयालु महिला उद्यमी का किरदार जो उत्तरा देवी के बिलकुल विपरीत है. शो में मेरे लुक पर काफी काम किया गया है जो बिलकुल अलग है. मैंने जीजी माँ के पूरे अनुभव का आनंद उठाया , और मैं जो कर रही थी उसको लेकर खुश थी.”

शुरू होने वाला है निमकी के जीवन का सबसे बड़ा अध्याय

मुम्बई : स्टार भारत के शो ‘निमकी मुखिया’ में आजकल दर्शकों को हाई वोल्टेज इलेक्शन ड्रामा देखने को मिल रहा है.
शो में परिस्थितियां कुछ ऐसी बनती हैं कि निमकी को मुखिया के चुनाव में खड़ा होना पड़ता है. और कई रोमांचक उतार-चढ़ाव के बीच आख़िरकार निमकी जीत जाती है.
निमकी के गांव की पहली महिला मुखिया बनने के साथ ही दर्शकों की इस शो से मनोरंजन के डोज की अपेक्षाएं कई गुना बढ़ गई हैं. दर्शकों को निमकी के मुखिया बनने और उसके अनूठे तरीके से सामाजिक बदलाव लाने का का इंतजार है.
निर्माताओं ने अपनी तरफ से पूरी कोशिश की है कि शो की ये अनापेक्षित हीरो हमारे देश की पुरानी समस्याओं का कुछ अलग तरीके से समाधान निकालेगी. इसलिए उन्होंने ग्रामीण क्षेत्र की वास्तविक समस्याओं पर गहराई से रिसर्च किया. शो के लेखक जमा हबीब ने ग्रामीणों की समस्याओं का निमकी के स्टाइल में समाधान निकाला .
जमा हबीब कहते हैं, “ एक साथ दो बड़ी ख़बरें मिलने, एक ओर चुनाव जीतने और दूसरी तेतर का प्रस्ताव से, निमकी सातवें आसमान पर है. अब निमकी के जीवन का सबसे बड़ा अध्याय शुरू होने वाला है, जो षड्यंत्र,  ड्रामा,  रोमांस और चुनौतियों से भरा होगा. अपने जीवन में आए इन
उतार-चढ़ावों से वह कैसे निपटती है,  यह देखना बहुत दिलचस्प होगा और शो के मनोरंजन को और बढ़ाएगा. मैं सिर्फ इतना कह सकता हूं कि निमकी मुखिया की दिलचस्प जर्नी को देखते रहिए क्योंकि ऐसी कहानी आपने हिंदी टेलीविजन पर शायद पहले नहीं देखी होंगी.”
निमकी की भूमिका निभाने वाली भूमिका गुरुंग कहती हैं, “इस शो में अप्रत्याशित की उम्मीद कीजिए. निमकी ने कभी चुनाव में खड़े होने की कल्पना नहीं की थी और अब वह मुखिया बन गई है. निमकी मुखिया की एक्चुअल जर्नी (वास्तविक यात्रा) अब शुरू होती है. वह जहाँ जा रही है उन चीज़ों से अभी वह अनजान है, लेकिन जल्द ही वह अपनी तरीके से ( जरा हट के) चुनौतियों का सामना करना शुरू कर देगी.”